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Videsh Yatra ke Saral Yog - विदेश यात्रा के सरल योग

विदेश यात्रा की ग्रह स्थिति और कारण

कुंडली का दूसरा भाव परिवार के बारे में बताता है, परिवार के निकट सदस्‍यों के बारे में बताता है। पृथकतावादी ग्रहों के प्रभाव में जातक अपने परिवार से दूर हो जाता है इसलिए विदेश यात्रा के संदर्भ में दूसरे घर का अध्‍ययन किया जाता है।

कुंडली के चौथे भाव से हम जातक के मकान के बारे में विचार करते है, क्‍या जातक का अपना मकान होगा या नहीं? जातक की जन्‍मभूमि के बारे में विचार करते है। क्‍या जातक का अपनी जन्‍मभूमि से लगाव होगा? क्‍या जातक अपनी जन्‍मभूमि के पास रहेगा या दूर चला जाएगा? यदि जातक दूर चला जाएगा तो क्‍या वापस अपनी जन्‍मभूमि लौटकर आएगा? इसलिए विदेश यात्रा के संदर्भ में दूसरे घर का अध्‍ययन किया जाता है।

कुंडली के तीसरे घर के अध्‍ययन से हमें अन्‍य बातों के अतिरिक्‍त इस बात की जानकारी मिलती है कि जातक के भाग्‍य में यात्राएं कितनी लिखी है। तीसरा भाव जातक के द्वारा की जाने वाली छोटी यात्राओं को व्‍यक्‍त करता है।

कुंडली का पॉंचवा भाव पढाई का, अध्‍ययन का प्रतिनिधित्‍व करता है। इस  भाव का इसलिए विचार करते है कि क्‍या जातक विदेश में अध्‍ययन के लिए जाएगा।

कुंडली का नवम भाव जातक के द्वारा की जाने वाली विदेश यात्राओं का प्रतिनिधित्‍व करता है। यह भाव जातक द्वारा की जाने वाली लंबी यात्राओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इस भाव के अध्‍ययन से यह भी पता चलता है कि जातक के द्वारा की जाने वाली यात्राएं शुभदायक और फलदायक होंगी या नहीं?

कुंडली के आठवें घर को इसलिए देखते हैं क्योंकि आठवां घर दूसरे घर के बिल्कुल सामने है यानी घर से दूर परिवार से दूर। आठवां घर संपत्‍ति से जुडा है, अचानक प्राप्‍त होने वाले लाभ-हानि का इससे विचार किया जाता है। यह भाव आयात-निर्यात इत्‍यादि के बारे में भी बताता है।

विदेश यात्रा के संदर्भ में कुंडली के दसवें घर को इसलिए देखते हैं क्योंकि यह भाव आजीविका का प्रतिनिधित्‍व करता है। इससे हमें यह जानकारी प्राप्‍त होगी कि जातक की आजीविका का माध्‍यम क्‍या होगा।

कुंडली के ग्‍यारहवें भाव के अध्‍ययन से यह पता चलता है कि जातक की आय का स्रोत क्‍या होगा, जातक किस प्रकार संपत्‍ति अर्जित करेगा। इस भाव के अध्‍ययन से आवश्‍यक नहीं कि व्‍यवसाय के बारे में मालूम होगा बल्‍कि यह भाव आपको विदेश से प्राप्‍त होने वाली आय के स्रोत के बारे में भी बताता है।

जातक की जन्‍म कुंडली का बारहवां भाव दूर-दूर की यात्राओं के रूप में, विदेश यात्राओं के रूप में जातक के अपने मूल निवास स्‍थान से अलगाव को दर्शाता है। इस भाव में यदि ग्रह स्‍थित हों तो उन ग्रहों से संबंधित रिश्‍तेदारों से अलगाव हो जाता है। यह भाव यदि पीडित हो तो जेल यात्रा के बारे में भी बताता है।

आईए हम संक्षिप्‍त में विदेश जाने के विभिन्‍न योगों के बारे में आपको बताते है:-

पढ़ाई के लिए विदेश यात्रा

पांचवा घर एजुकेशन अर्थात अध्‍ययन का है। सूर्य, बुध, राहु और द्वादशेश इन चारों में से दो या दो से अधिक ग्रह जब कुंडली के पांचवे घर के स्वामी के साथ कुंडली के चौथे, छठे, आठवें, नवम या बारहवें भाव में विराजमान होते हैं तब जातक पढ़ाने के लिए विदेश जाता है

परिवार की ओर से विदेश यात्रा का निमंत्रण

जन्‍म कुंडली का दूसरा भाव परिवार का प्रतिनिधित्‍व करता है। जब कुंडली के दूसरे घर का स्वामी कुंडली के छठे, आठवें, बारहवें घर में विराजमान हो तब जातक अपने परिवार के किसी व्यक्ति अर्थात रिश्‍तेदार की मदद से विदेश यात्रा करता है। उदाहरण के लिए जातक द्वारा अपने माता पिता को विदेश बुला लेना इस श्रेणी में आता है।

कुंडली का ग्‍यारहवां भाव आय का (इनकम का) भाव है, वहीं कुंडली का दसवां भाव जातक की आजीविका का प्रतिनिधत्‍व करता है। जब  दसवें और गयारहवें भाव के स्वामी  ग्रह कुंडली के छठे,  आठवें, या बारहवें भाव में विराजमान हो तब जातक आजीविका के लिए, पैसा कमाने के लिए विदेश जाता है।

विदेश में जाकर फंस जाने का योग

कुंडली के बारहवें स्‍थान से कारावास का भी विचार किया जाता है। यदि कुंडली के बारहवें भाव में एक से अधिक ग्रह मौजूद हो तो व्यक्ति विदेश में जाता अवश्य है परंतु वहां पर समय अधिक नष्ट करता है और कारावास जैसी स्थिति में रहता है

कुंडली के छठे भाव से विदेश यात्रा का योग

जब विदेश यात्रा का योग कुंडली के छठे घर से बनता हो तब व्यक्ति ऐसी जगह, ऐसे देश में जाता है जहां पर मजबूरी में रहना पड़े। ऐसी स्थिति उन लोगों की कुंडली में देखी गई है जिनका पासपोर्ट, कागज-पत्र कंपनी के पास रख लिए जाते हैं और व्यक्ति के वहां पर रहने की तुलना दांतों के बीच जीभ के रहने के समान की जा सकती  है।

कुंडली के तीसरे भाव से बनने वाला विदेश यात्रा का योग

जन्म कुंडली का तीसरा भाव यात्राओं का स्थान माना जाता है यदि नौवें भाव के स्वामी का संबंध तीसरे भाव के स्वामी से हो जाए और विदेश यात्रा का योग भी जन्म कुंडली में विद्यमान हो तब व्यक्ति विदेश यात्रा करता रहता है, आता जाता रहता है। उदाहरण के तौर पर कुंडली के बारहवें घर का स्वामी यदि तीसरे घर में हो या फिर कुंडली के छठे, आठवें, बारहवें घर का स्वामी तीसरे भाव में विद्यमान हो तो ऐसी स्थिति होती है। व्यक्ति बार-बार विदेश जाता है और आना जाना लगा रहता है।  इस संदर्भ में आप बॉलीवुड के फिल्म स्टार की कुंडलियां देख लीजिए सबकी कुंडलियों में यह योग आपको किसी ना किसी रूप में मिल जाएगा

कुंडली के आठवें घर से बनने वाला विदेश यात्रा का योग

यदि जन्म कुंडली के आठवें भाव में दो या दो से अधिक ग्रह विद्यमान हो तो व्यक्ति अपनी ससुराल के माध्यम से या फिर ससुराल की मदद से विदेश जाता है और काफी समय विदेश में रहता है।

इस तरह आप देखेंगे कि विदेश यात्रा के योग इतने हैं कि सबका वर्णन नहीं किया जा सकता और सबको लिखना शुरू किया जाए तो इस पर किताब लिखी जा सकती है परंतु मैंने प्रयास किया है विदेश यात्रा के योगों के बारे में संक्षिप्‍त में बताने का। मेरे नियमों से सहमत या असहमत होने का आपको पूरा हक है यदि लेख अच्छा लगा हो तो लाइक या शेयर  करें, यदि अच्छा नहीं लगा हो तब टिप्‍पणी तो अवश्य करें, उस अवस्था में प्रयास किया जाएगा इस लेख को और भी अधिक उत्तम बनाने का। तब तक के लिए अपना बहुमूल्य समय देने का मैं आपको धन्यवाद देता हूं

 

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