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Relations & Horoscope

रिश्ते और ज्योतिष मानव एक सामाजिक प्राणी है | हम समाज से जुड़े रहते हैं | समाज में भी हम रिश्तों की डोर से बंधे रहते हैं | कभी कभी रिश्ते हमारे लिए महत्वपूर्ण बन जाते हैं | ऐसे भी रिश्ते होते हैं जिनसे हमें ख़ास लगाव रहता है | Not Readable? Download PDF File यदि ये रिश्ते न हों तो शायद दुनिया में किसी को किसी की या फिर यूं कहिये कि अपनी भी फ़िक्र न हो | इन्ही रिश्तों को ज्योतिष की दृष्टि से भी देखा जा सकता है | आपकी जन्मकुंडली बता सकती है कि आपके परस्पर सम्बन्ध कैसे रहेंगे | भाई, बहन, माँ बाप, दादा, दादी, नाना और नानी से लेकर ससुराल सास ससुर और साले आदि का भी विश्लेष्ण आपकी जन्मकुंडली के द्वारा किया जा सकता है | शुक्र स्त्री का कारक है | पुरुष की कुंडली हो तो शुक्र पत्नी का कारक है | चंद्रमा माता है और सूर्य पिता हैं | बुध से छोटी या बड़ी बहन का विचार किया जाता है | मंगल भाई का कारक है | गुरु स्त्री की कुंडली में पति का परिचायक है | अधिक अंशों में बुध का विचार मामा से किया जाता है | मामा या मौसी के बारे में देखने के लिए बुध के अंश देखिये | अधिक गहराई से देखने के लिए मैं हमेशा नक्षत्रों को भी गिनता हूँ | शनि से ताया का विचार किया जाता है और राहू से ससुराल और ससुराल से जुड़े सभी लोगों का पता लगाया जाता है | यदि हम नक्षत्रों को साथ लेकर चलते हैं तो हम गहराई से किसी भी रिश्ते के बारे में जान सकते हैं | जैसे कि मेरी ससुराल कैसी होगी | मेरी सास के साथ मेरी बनेगी या नहीं | साले और सालियाँ या जीजा और बड़ी बहन के विषय में राहू और राहू के नक्षत्रों से काफी कुछ जाना जा सकता है | इसी तरह हम जन्मकुंडली में भी देख सकते हैं | पहला घर यानी आप | आपसे सातवाँ घर आपकी पत्नी का है | लग्न से चौथा घर यानी माँ का है तो माँ के घर से सातवाँ आपके पिता का | तीसरे घर से भाई का विचार किया जाता है और भाई के घर से सातवाँ उसकी पत्नी यानी आपकी भाभी का है | ननिहाल से सम्बंधित रिश्ते देखने के लिए आपको माता के घर का पता होना आवश्यक है | तभी आप ननिहाल पक्ष के नातेदारों के विषय में देख पायेंगे | कुंडली का चौथा घर आपकी माँ का है और माँ का भाई यानी आपके मामा या माता की बहन यानी आपकी मौसी के बारे में जानने के लिए माता से तीसरा Read more…