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Power of Mind

Power of Mind

It is said that our “Mind” is the most powerful thing in the world. Once we decide no one can stop us to do anything. There is nothing impossible if you determined to do anything in your mind. There is countless saying of “Mind” to prove the power of Mind.

Yudhishtar while giving the reply of Yaksa’s questions said that the fastest thing in this world is speed of “mind”. Maharishi Patanjali has also written while describing Ashtanga Yoga, “योगष्चित्तवृत्ति निरोध:” keeping the control of the “mind” is the Yoga. The reason for all these things being written is that unlimited powers are hidden in our mind. If we recognize these powers, then we can be able to do anything.

Powers of mind

Our “Mind” never stop, it constantly moving, keeps many questions in front of you, reacts, but don’t forget the same “mind” is capable of answering all your questions. This is the truth, which no one can deny If you make a firm resolve, then you do not have to remember anything. But the irony is that there are very few who believe in it because the powers of the mind have not yet been known.

Our “Mind” is so strong that its resolution only can get rid of cancer like illness. If you ask people who have won the battle of cancer, they will tell that they did not let their confidence down. It will be almost the opinion of all the people who have won on cancer that we have made our “mind” and that is why they successfully dealt with this wretched situation.

Let’s try to understand “mind” from astrological viewpoint. The “mind” in astrology is represented by the Moon. Rahu is a planet that does not correspond to the moon; it is considered the enemy of Moon because it eclipses the Moon. Therefore, whenever Rahu influence the life of a person, then he will not be able to hear his inner core; he will not recognize the powers of “mind”. Being in control of Rahu, due to many questions, the situation will become worse.

Now the question arises how the mind can be conquered, the simple and straightforward answer to this keeps practice. To keep the mind in control, we have to free ourselves from the useless & worthless thoughts. We have to practice to stop thinking and reach the stability of thoughtlessness. We have to practice to control our thought to recognize the powers of our mind. You will see that there were so many questions that you were confused even when you got the answer, but they started resolving. First of all, it is necessary to close your eyes and then try to reach the position where there is no thinking, no idea.

If necessary, consult a qualified guru and practice it, the most effective thing is “meditation” than any other Mantra. “Meditation” is actually a science that takes us away from the world. Applying “meditation” can solve any complex problem.

These things will look weird in hearing and seeing. But those who really believe in the power of their mind, they only know that every single word written above is consolidated in itself.

Mann ki shaktiyan

आपके मन की शक्तियां

हमारा “मन” जिसे अंग्रेजी में हम मांईड भी कहते है बहुत ही चमत्‍कारी होता है। बस आपको विश्‍वास बनाए रखना है इस पर। पहचाने अपने मन को, जानिए अपने मन को, कमजोर नहीं है यह, भरोसा रखिए अपने मन की शक्‍तियों पर। “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत” ये कहावत ऐसे ही नहीं बनी है।

युधिष्‍ठर ने यक्ष के प्रश्‍नों का उत्‍तर देते हुए बताया था कि इस संसार में सबसे तीव्र गति “मन” की होती है। महर्षि पतजंलि ने भी अष्‍टांग योग का प्रतिपादन करते हुए लिखा है “योगष्चित्तवृत्ति निरोध:” अर्थात मन की गति को नियंत्रण में रखना ही योग है। इन सब बातों के लिखा जाने का कारण है कि हमारे मन में असीम शक्तियां छुपी हुई हैं। यदि हम इन शक्‍तियों को जान लें तो हम कुछ भी करने में समर्थ हो सकते है।

आपका मन निरंतर गतिमान रहता है, अनेकों प्रश्न आपके सामने रखता रहता है, प्रतिक्रिया व्यक्त करता हैं परंतु ध्‍यान रखिए यही मन आपके सारे प्रश्नों के उत्तर देने में भी समर्थ है। यह एक ऐसा सत्य, जिसे कोई नकार नहीं सकता। लेकिन वर्तमान में चीजों को याद रखने की हमारी आदत घटती जा रही है। यदि आप दृढ निश्‍चय कर ले तो आपको कुछ भी याद रखने की आवश्‍यकता नहीं है। मन चाहे तो निश्चित वस्तु या व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है परंतु इस बात पर भरोसा करने वाले बहुत कम है क्योंकि मन की शक्तियों को अभी तक जाना ही नहीं गया है।

आपका मन इतना शक्‍तिशाली है कि इसके संकल्‍प मात्र से कैंसर जैसी बीमारी से मुक्ति मिल जाती है। कैंसर की लड़ाई जीत चुके लोगों से यदि आप पूछेंगे तो वे बताएंगे कि उन्‍होंने अपना आत्‍मविश्‍वास डिगने नहीं दिया। कैंसर पर विजय प्राप्त करने वाले सभी लोगों की राय लगभग यही होगी कि हमने “मन” बना लिया था और इसीलिए इस विकट परिस्थिति से सफलतापूर्वक निपट पाए।

चलिए इसी विषय पर बात करते हुए ज्‍योतिषिय दृष्‍टिकोण से समझने का प्रयत्‍न करते है “मन” को। ज्योतिष में “मन” का कारक चंद्रमा है। राहु ऐसा ग्रह है जो चंद्रमा के अनुरूप नहीं है क्‍योंकि यह चंद्रमा को ग्रहण लगाता है। इसलिए जब भी किसी व्‍यक्‍ति के जीवन पर राहु का प्रभाव अधिक होगा तो वह अपने अंतर्मन की सुन नहीं पाएगा, “मन” की शक्तियों को पहचान नहीं पाएंगा। राहु के वशीभूत होकर अनेकों सवालों के चक्कर में पडकर परिस्‍थिति को विकट बना देगा।

अब प्रश्न उठता है कैसे मन पर विजय प्राप्त की जाए इसका सीधा और सरल उत्तर यही है अभ्‍यास। मन को नियंत्रण में रखने के लिए व्‍यर्थ के विचारों से अपने को मुक्‍त करना पडता है, मन को शून्‍य पर स्‍थिर करने का अभ्‍यास करना पडता है, सोचना बंद करके विचारशून्‍य की स्‍थिति में पहुँचना पडता है। अपने मन की शक्तियों को पहचानने के लिए अपनी सोच को नियंत्रित करने की प्रैक्टिस कीजिए। आप देखेंगे कि ढेरों प्रश्न ऐसे थे जिनके उत्तर आपके पास होते हुए भी आप उलझन में थे लेकिन वे सुलझने लगे हैं। इसके लिए सबसे पहले एकांतवास जरूरी है इसके पश्चात आंखें बंद करके विचारशून्‍य होने का प्रयास कीजिए।

यदि आवश्यकता पड़े किसी योग्य गुरु से परामर्श लें और इसका अभ्यास करें याद रहे किसी भी मंत्र से अधिक प्रभावशाली “ध्यान” है क्योंकि “ध्यान” वास्तव में एक विज्ञान है जो हमें दुनिया से दूर ले जाता है। “ध्यान” लगाने से जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान हो सकता है।

सुनने और देखने में यह बातें अजीब लगेगी परंतु जो लोग वास्तव में अपने मन का सहारा लेंगे वही जान पाएंगे कि ऊपर लिखा एक एक शब्द अपने आप में कितनी गहराई संजोए हैं।

 

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