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परम्परागत मेलापक और दाम्पत्य

भारतीय ज्योतिष में जन्मकुंडली के द्वारा विवाह से पूर्व लड़का और लड़की के भावी जीवन के सन्दर्भ में की जाने वाली गणना को मेलापक कहते हैं | इसमें वर्ण, वश्य, तारा या दिन, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाडी इन सब का विचार किया जाता है | मेलापक के ये सभी अंग हैं |

जनसाधारण को इस बात का अधिक ज्ञान नहीं रहता है और कुछ उत्सुक पाठकों के निवेदन पर मुझे इस विषय पर प्रकाश डालने की अंत: प्रेरणा हुई | मुझे लगा कि लोगों को पता होना चाहिए कि यह चक्र काम कैसे करता है | मेलापक में क्या चीजें देखी जाती हैं और उनका कितना महत्व होता है |

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मेलापक (कुंडली मिलान) कैसे काम करता है

सबसे पहले वर्ण आता है | वर्ण को चार भागों में बांटा गया है | ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र | दोनों की कुंडली में देखा जाता है कि वर्ण क्या है | वर्ण से पति पत्नी के बीच सामंजस्य का पता लगाया जाता है | यदि पति ब्राह्मण है तो पत्नी का वर्ण शूद्र नहीं होना चाहिए परंतु साफ्टवेयर में देखने पर इसकी गणना का अधिकतम अंक १ होता है जो कि हर पति पत्नी की कुंडली में समान ही आता है | इसकी सूक्ष्म गणना यही है कि ब्राह्मण का ब्राह्मण या क्षत्रिय से मिलाप अच्छा है | शूद्र का शूद्र और वैश्य से मिलान शुभ है अस्तु |

आजकल कम्प्यूटर से जन्मपत्री बनायीं जाती है और कोई इस बात पर ध्यान नहीं देता कि यदि मिलान करना हो तो उसे गहराई से भी किया जा सकता है |

वश्य से पति पत्नी के बीच आकर्षण का पता चलता है | तारा से दोनों के स्वास्थ्य का पता लगाया जाता है | योनी से पता चलता है कि पति पत्नी एक दूसरे से संतुष्ट रह पाएंगे या नहीं |

ग्रह मैत्री और भी सूक्ष्म हो जाती है और आप पता लगा सकते हैं कि आपका पति या आपकी पत्नी कहाँ तक सोच सकती है | गण से संबंधों का पता चलता है | यदि विवाह के बाद आपका क्रोध बढ़ जाए तो समझ लें कि आपकी पत्नी के गण आपसे मेल नहीं खाते |

भकूट से पारिवारिक जीवन का भान होता है | आपके परिवार में शान्ति व्यवस्था कैसी होगी इसके लिए भकूट को देखते हैं |

नाडी से स्वास्थ्य के सम्बन्ध में आने वाली बड़ी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है |

मैंने एक चीज जो हर कुंडली में देखी है वो ये है कि २ कुंडलियाँ देखते ही पता चल जाता है कि यह पति पत्नी बनेंगे अर्थात यदि आप कुंडली मिलान करवा रहे हैं तो कोई भी विशेषज्ञ देखते ही बता सकता है कि आप पति पत्नी संजोग हैं या नहीं |

कुंडली मिलान कैसे करें

बहुत ही आसान सा तरीका है | आप भी जान सकते हैं | यदि आपका सप्तमेश और आपके साथी का सप्तमेश एक ही ग्रह है तो शादी संभव है | यदि लड़की का गुरु और लड़के का शुक्र एक ही राशि में हों तो विवाह के संजोग हैं | यदि दोनों के सप्तमेश एक दूसरे की राशि में बैठे हैं तो भी मिलान करने की आवशयकता नहीं | यदि दोनों मंगली हैं और दोनों का मंगलीक योग शांत है तो विवाह करने में देरी नहीं करनी चाहिए | यदि शुक्र और गुरु का सम्बन्ध किसी भी प्रकार से दोनों की कुंडली में हो जाता है तो भी विवाह संभव है |

इतने सारे तरीके हैं जिन्हें लिखने के लिए पेज कम पड़ जायेंगे परंतु फिर भी लोग मिलान में कोई न कोई त्रुटि अवश्य कर देते हैं | यदि आप मिलान करने में किसी भी प्रकार कि असुविधा महसूस कर रहे हैं तो किसी विद्वान से परामर्श अवश्य लें |

Horoscope-India और मेलापक

यदि आपको किसी ज्योतिषी से मिलने में संकोच हो या आप किन्ही कारणों से सही मिलान नहीं कर पा रहे हैं तो घर बैठे ही केवल एक ईमेल द्वारा मुझे सूचित करें | हमारी मेम्बरशिप लें और कुंडली मिलान से लेकर शादी तक का सहयोग आप मुझ पर छोड दें | यानि किसी भी प्रकार की कोई शंका मन में हो तो तुरंत फोन करें | मैं कितना भी व्यस्त हूँ यदि आपका प्रश्न मेलापक से सम्बन्ध रखता है तो आपको केवल आधे घंटे के अंदर समाधान मिलेगा | अभी तक हमने अपने सभी मेम्बर्स को संतुष्ट किया है | आशा है कि आगे भी करते रहेंगे |

जय श्री राम

भारतीय ज्योतिष में जन्मकुंडली के द्वारा विवाह से पूर्व लड़का और लड़की के भावी जीवन के सन्दर्भ में की जाने वाली गणना को मेलापक कहते हैं | इसमें वर्ण, वश्य, तारा या दिन, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाडी इन सब का विचार किया जाता है | मेलापक के ये सभी अंग हैं | जनसाधारण को इस बात का अधिक ज्ञान नहीं रहता है और कुछ उत्सुक पाठकों के निवेदन पर मुझे इस विषय पर प्रकाश डालने की अंत: प्रेरणा हुई | मुझे लगा कि लोगों को पता होना चाहिए कि यह चक्र काम कैसे करता है | मेलापक…

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