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संयुक्त रत्न – क्या एक साथ कई रत्न पहने जा सकते हैं?

रत्नों की प्रमाणिकता इसी बात से सिद्ध हो जाती है की प्राचीन ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है राजा महाराजाओं के मुकुट की शोभा बढ़ाने वाले रत्न ग्रहों से सीधा संबंध रखते हैं यदि ऐसा ना होता तो करोड़ों अरबों लोगों के हाथों में रत्नजडित अंगूठियां देखने को ना मिलती।

परंतु यह पोस्ट रत्नों की प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए नहीं है अपितु कुछ लोगों का कहना है की उन पर रत्न का विशेष प्रभाव नहीं हुआ इस संबंध में अपनी मंद बुद्धि से मैं अपने पाठकों को यह बताना चाहता हूं की रत्न विशेषज्ञ कहलाने के लिए किसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं रहती परंतु जो वास्तव में रत्न विशेषज्ञ है उसके पास आपके लिए एक ऐसी बहुमूल्य सलाह रहती है जिसके बल पर आप ग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

एक हाथ में कई रत्न

कभी-कभी होता यह है कि एक ही व्यक्ति ने चार या पांच रत्न धारण कर रखे हैं ऐसे में यह पता नहीं चलता कि कौन सा रत्न हानि कर रहा है कौन सा लाभ दे रहा है इसलिए यदि आवश्यक हो तो 12 से अधिक रत्न मत पहने बहुत कम लोगों को तीन रत्न पहनने की सलाह दी जाती है परंतु इससे अधिक रत्न मैंने अपने जीवन में किसी को पहनने की सलाह नहीं दी।

आइए अब बात करते हैं संयुक्त रत्नों की किसी एक रत्न के साथ दूसरा रत्न पहनना संयुक्त रत्न कहलाता है इन संयुक्त रत्नों को पहनने से पहले विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है किताबों किस्से कहानियों में आपको यह सब बातें सीखने को नहीं मिलेंगी क्योंकि वहां केवल वही लिखा है जो उस युग के लिए उपयुक्त था आज का युग अलग है आज की आवश्यकताएं अलग हैं आज की प्राथमिकताएं अलग हैं इसलिए कुछ नियम ऐसे हैं जो किताबों में कभी नहीं लिखे गए जो केवल तभी प्रकट हुए जब उनकी आवश्यकता आन पड़ी।

गुरु और बुध आपस में पिता-पुत्र हैं फिर भी दोनों की शत्रुता है दोनों के रत्नों को पहनने की सलाह कभी नहीं दी जाती इसी तरह मंगल और केतु दोनों अग्नि से संबंध रखते हैं इसलिए मंगल का मूंगा और केतु का लहसुनिया यह दोनों पहनने की सलाह नहीं दी जाती परंतु विशेष परिस्थितियों में यदि पहनना पड़े तो वह परिस्थितियां स्पष्ट कर रहा हूं सारी नहीं तो कम से कम कुछ परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें आप किन्ही दो रत्नों को एक साथ पहन सकते हैं।

यदि मंगल और केतु गुरु की राशियों में हो धनु मीन तो इन दोनों के रत्नों मूंगा और लहसुनिया को एक साथ पहना जा सकता है।

सिंह लग्न में बुध और गुरु दोनों लग्नेश सूर्य के मित्र बनते हैं यदि आपका सिंह लग्न है तो पुखराज और पन्ना एक साथ पहने जा सकते हैं परंतु अलग हाथों में।

मंगल और शुक्र आपस में एक दूसरे के शत्रु हैं परंतु यदि मंगल और शुक्र का आपस में राशि परिवर्तन नक्षत्र परिवर्तन है तो मूंगा और हीरा एक साथ पहन सकते हैं परंतु अलग-अलग हाथ में।

उपरोक्त लिखित सिद्धांत व्यवहार में आजमा कर देख चुका हूं जिस से कोई हानि नहीं हुई है अपितु लाभ हुआ है अब बात करेंगे मित्र ग्रहों के रत्नों की।

माणिक मूंगा मोती और पुखराज इन चारों में से किन्ही दो रत्नों को जो आपके लिए शुभ प्रभाव प्रकट करते हैं आप पहन सकते हैं आवश्यकता है इस बात की पुष्टि करने की कि वह दोनों रत्न आपको सूटेबल हैं।

हीरा पन्ना नीलम और गोमेद इन 4 रत्नों को आपस में मित्र रत्न समझा जाता है परंतु नीलम के साथ पन्ना कभी ना पहने इससे नपुंसकता में वृद्धि हो सकती है इसके बजाय फिरोजा पहने जिसमें शनि और बुध दोनों ग्रहों का प्रभाव है।

हीरे के साथ नीलम अत्यंत प्रभावशाली बन जाता है यदि सूटेबल हो तो।

तुला लग्न के लोग हीरा नीलम दोनों इकट्ठे पहन सकते हैं अर्थात एक ही अंगूठी में दोनों रत्नों को जड़वाकर पहन सकते हैं।

मंगल और शनि की युति हो तो नीलम और मूंगा पहनने के स्थान पर तिकोना मूंगा और शनि का उपरत्न पहने।

गुरु और सूर्य की युति हो तो पुखराज के साथ माणिक का उपरत्न पहने।

सूर्य बुध की युति में यदि सूर्य और बुध के अंदर 8 अंश का अंतर हो तो माणिक के साथ पन्ना पहना जा सकता है।

इसके अतिरिक्त बहुत से ऐसे नियम हैं जिन्हें ग्रह स्थिति देखकर ही बताया जा सकता है ध्यान रहे उपरोक्त किसी भी प्रकार के नियम को परखने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।

रत्नों पर एक किताब लिखी जा सकती है परंतु फिलहाल समयाभाव और स्थानाभाव के कारण लेख को यहीं विराम देता हूं और आशा करता हूं की पाठकों को लेख अच्छा लगा तो शेयर अवश्य करेंगे धन्यवाद।

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