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जन्मकुंडली और पुनर्विवाह

पुनर्विवाह एक नया जीवन

मैंने जब से ज्योतिष के क्षेत्र में कदम रखा है तब से विवाह और पुनर्विवाह के केस ६० फीसदी आते हैं | ये आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि दाम्पत्य जीवन एक तरह से नया जनम होता है जो तभी सार्थक हो सकता है यदि संबंधों के प्रति पति पत्नी का मत सामान हो |

पुनर्विवाह जिनका होता है उनके जीवन में पिछले विवाहित जीवन की टीस होती है जो वर्तमान में तालमेल बिठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | इसी टीस को हम ज्योतिषीय दृष्टि से यदि देखें तो नजारा कुछ और ही होता है |

यदि हर जोड़े को पहले से पता चल जाए कि उनके सम्बन्ध भविष्य में कटु होने वाले हैं तो शायद ही कोई शादी करे | परंतु हमारा काम शादियों को रोकना नहीं अपितु हर विवाह को एक सफल परिवार का रूप देना है जिसके लिए हम तत्पर हैं |

राहू और पुनर्विवाह

जन्मकुंडली में पुनर्विवाह का योग देखने के लिए हम सबसे पहले सप्तम स्थान पर दृष्टि डालते हैं | यहाँ कितने ग्रह उपस्थित हैं | कितने ग्रह इस स्थान को देख रहे हैं | कितने ग्रह शुक्र और गुरु को प्रभावित कर रहे हैं और सबसे बढ़कर होता है सम्बन्ध विच्छेद का योग जो कि राहू पैदा करता है | राहू अलगाव पैदा करने के लिए जाना जाता है | जिस स्थान में बैठा होगा अधिकतर तो उस स्थान से व्यक्ति को दूर कर देगा | यदि पिता के स्थान में है तो पिता से दूर रखेगा यदि अष्टम भाव में है तो अपने देश से दूर कर देगा और यदि सप्तम में राहू है तो जीवन साथी से दूर कर देगा |

हर तरह से नुक्सान देने में सक्षम यह ग्रह आपको तरह तरह के लालच देता है | सब्ज बाग दिखता है | आपके मन को मोह लेने में राहू सक्षम है | आपने देखा होगा कि एक व्यक्ति किसी स्त्री के मोह जाल में फंस जाता है जबकि उस स्त्री में ऐसा कुछ भी खास नहीं है | यदि ऐसा कुछ आप कभी देखें तो राहू का असर समझना चाहिए | क्योंकि राहू सोचने समझने का मौका ही नहीं देता है |

अधिकतर प्रेम विवाह राहू और केतु के प्रभाव में क्यों होते हैं | क्यों लोग कहते हैं कि प्रेम विवाह किसी किसी के जीवन में सफल होते हैं | क्या यह राहू नहीं है जो पहले कुछ और होता है और बाद में कुछ और हो जाता है ?

यह तो रही राहू की बात अब जरा और तथ्यों पर भी नजर डालते हैं जो कि दाम्पत्य जीवन को स्वाहा कर देने में सक्षम हैं |

सूर्य और दाम्पत्य जीवन

सूर्य एक पाप ग्रह है | जो ग्रह इसके साथ बैठेगा वह अंधा हो जाएगा यानि अस्त हो जाएगा | अस्त ग्रह का प्रभाव बहुत कम पड़ता है | अपनी राशि में होने के बावजूद उसका असर कम रह जाता है जिस प्रकार अपने ही घर में किसी घर के किसी सदस्य का प्रभाव शून्य हो जाता है | यह स्थिति किसी अन्य सदस्य के प्रभाव के कारण ही उत्पन्न होती है |

सप्तम स्थान में सूर्य का होना पारस्परिक विच्छेद या अलगाव की स्थिति उत्पन्न करता है |

मांगलिक योग और पुनर्विवाह

मांगलिक योग के विषय में सभी जानते हैं | मांगलिक योग को आज भी लोग नहीं मानते | यदि कुछ लोग मानते भी हैं तो अच्छा रिश्ता आने पर कोई अन्य विकल्प ढूँढने लगते हैं | मांगलिक की शादी मांगलिक से होनी आवश्यक है अन्यथा पुनर्विवाह की स्थिति बन सकती है |

गुरु और पुनर्विवाह |

गुरु यानि बृहस्पति एक नैसर्गिक शुभ ग्रह है जो जहाँ भी बैठता है शुभ और मांगलिक कार्य ही करता है | शुभता प्रदान करना बृहस्पति का स्वाभाविक गुण है | परंतु पुनर्विवाह के लिए यही शुभ ग्रह एक बाधा बन सकता है यदि गुरु की दृष्टि सप्तम स्थान पर हो तो पहले विवाह से ही छुटकारा नहीं मिलता या यों कहिये के तलाक के योग ही नहीं बनते | जो लोग अपने वर्तमान दाम्पत्य जीवन से संतुष्ट नहीं हैं उन्हें गुरु की दृष्टि के रहते तलाक की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए |

निष्कर्ष यही है कि पुनर्विवाह की आस में जीने वाले लोगों को यथासंभव अपने वर्तमान दाम्पत्य जीवन को बचा कर रखना चाहिए | क्या पता किसी अन्य कारण से आपको लग रहा हो कि आपका निर्वाह होना मुश्किल है | यदि इस बात में जरा सी भी सच्चाई है तो एक घर टूटने से बच सकता है |

यदि फिर भी कोई जिज्ञासा आपके मन में हो और आपको लगे कि मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ तो संकोच मत कीजिये | मैं यथासंभव आपकी मदद करने का प्रयास करूँगा |

धन्यवाद

अशोक प्रजापति

 

 

 

 

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