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प्रेम सम्बन्ध

आजकल प्रेम संबंधों से जुड़े प्रश्न हर किसी ज्योतिषी के सामने रखे जाते हैं I हर युवा जानना चाहता है कि उसका जीवन साथी उसके लिए कैसा रहेगा I उत्तर मिल जाने के बाद भी कुछ लोग संतुष्ट नहीं हो पाते और यही प्रश्न फिर से जाग उठता है I इस लेख के जरिये मेरा प्रयास रहेगा कि मैं हर प्रेमी प्रेमिका की जिज्ञासा शांत कर सकूँ I

प्रेम सम्बन्ध पर भविष्य की पूरी बागडोर टिकी होती है I यदि संबंधों में दरार आ जाए तो जीवन नीरस लगने लगता है I ज्योतिष द्वारा संबंधों में मधुरता लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए उपाय भी उपलब्ध हैं परन्तु केवल अनुरोध पर I केवल आवश्यकता है समझने की कि कब क्या करना है I
आइये जानते हैं कुंडली में छिपे कुछ राज जो आप अपने जीवन साथी के विषय में नहीं जानते I

कुंडली में पंचम स्थान और शुक्र से प्रेम के विषय में जाना जा सकता है I प्रेम संबंधों से जुड़े सभी सूत्रों का पता पंचमेश यानी पंचम भाव में जो राशि है उसके स्वामी से लगाया जा सकता है I यूं तो बारीकी से केवल ज्योतिषी ही देख सकता है परन्तु ऐसी भी कुछ ग्रह स्थिति होती है जिसके आधार पर हम पता लगा सकते हैं कि प्रेम में हम कहाँ तक सफल रहेंगे I

पंचम भाव में सूर्य का होना प्रेम में असफलता दिलाता है I लाख कोशिश के बाद भी कोई सम्बन्ध सफल नहीं हो पाता I
पंचम पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि होने पर प्रेम सम्बन्ध बनते हैं और उस ग्रह पर किसी अशुभ ग्रह का प्रभाव पड़ने पर प्रेम सम्बन्ध बिगड़ जाते हैं I
पंचमेश शुभ ग्रह हो और शुभ स्थिति में हो तो प्रेम में सफलता मिलती है I
पंचम भाव में चन्द्र होने पर व्यक्ति प्रेम में अस्थिर होता है I किसी एक ही व्यक्ति के साथ लम्बे समय तक सम्बन्ध बने रहना मुश्किल होता है परन्तु चन्द्र उच्च का या स्वगृही हो तो प्रेम में सफलता दिलाता है I

मंगल के पंचम में होने से प्रेम में केवल असफलता ही मिलती है I लाख कोशिश करने के बाद भी प्रेम में निराशा ही हाथ लगती है I प्रेम विवाह में वाद विवाद अधिक होते हैं I
बुध के पंचम भाव में हो तो व्यक्ति प्रेम में चतुराई का इस्तेमाल अधिक करता है I झूठ को सच साबित करना जातक अच्छी तरह जानता है I बुध पर यदि राहू, मंगल या शनि का प्रभाव हो तो ऐसा व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता I
एक से अधिक शुभ ग्रह पंचम भाव में संकेत देते हैं कि सम्बन्ध भी एक से अधिक रहेंगे I शुक्र बुध दोनों पंचम में हों तो जातक जातिका के एक ही समय में अनेक लोगों से सम्बन्ध हो सकते हैं I
गुरु के पंचम भाव में होने से व्यक्ति नेकदिल और विश्वासपात्र होता है परन्तु गुरु यदि अकेला हो तो प्रेम सम्बन्ध नहीं बन पाते या फिर सफलता नहीं मिल पाती I
शुक्र का पंचम में होना व्यवहारिक रूप से शुभ नहीं होता I हालांकि अनेक स्त्रियों के साथ सम्बन्ध बनते हैं यदि जातिका हो तो अनेक पुरुषों के साथ सम्बन्ध होते हैं I शुक्र अशुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति के प्रेम में विशवास न करना ही ठीक रहता है I शुक्र के इस भाव में होने पर शुभ या अशुभ कुछ भी हो सकता है I इस विषय पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है परन्तु समयाभाव के कारण केवल इतना कहना ही काफी होगा कि शुक्र की इस स्थान में स्थिति कुल मिलाकर अच्छी नहीं कही जा सकती इसलिए प्रेम में सावधान रहें I

शनि के इस स्थान में होने से प्रेम के प्रति रुझान कम रहता है या न के बराबर होता है I शनि बड़े लक्ष्य का निर्देश देता है इसलिए यदि पंचम में शनि होगा और उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि होगी तो ऐसा प्रेम पूजा बन जाता है I

राहू या केतु का इस स्थान पर होना निस्संदेह प्रेम में उतार चढ़ाव का संकेत देता है I कुल मिलाकर यही ठीक रहता है कि प्रेम में झगडे और समस्याएं ही अधिक होंगी I

प्रेम विवाह के लिए पंचमेश का जो कि प्रेमी या प्रेमिका का प्रतिनिधित्व करता है, सप्तमेश यानी विवाह करने वाला ग्रह, इन दोनों का साथ बैठे होना जरूरी है I यदि दोनों जन्म लग्न में साथ न हों तो नवमांश चक्र में देखें और यदि वहां भी दोनों का कोई सम्बन्ध नहीं है तो इस योग को प्रेम विवाह का योग न समझें I

पंचमेश यदि शुक्र के साथ हो तो प्रेम विवाह हो सकता है I यह योग केवल पुरुषों के लिए है स्त्रियों के लिए गुरु का पंचमेश के साथ होना जरूरी है I

इसके अतिरिक्त भी कुंडली में देख कर पता लगाया जा सकता है कि प्रेम की राह पर आप कैसे रहेंगे I वे पाठक जो अपने विषय में जानना चाहते हैं Forum Page द्वारा मदद ले सकते हैं

Prem Sambandh as per Astrology

 

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