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Marriage with ficus tree in astrology - पीपल के वृक्ष से विवाह

पीपल के वृक्ष से विवाह

अक्सर ऐसा होता है कि कुछ लोगों को कुंडली के खराब ग्रहों के उपाय के लिए वृक्ष विवाह की सलाह दी जाती है। इस पोस्ट में मैं आपका ध्यान उस तरफ ले जाना चाहता हूं जिसके विषय में कोई नहीं सोचता।4

शीघ्र शादी के लिए वृक्ष विवाह 

जब कुंडली के सातवें घर पर मंगल का प्रभाव हो राहु की दृष्टि हो शनि का प्रभाव हो क्रूर ग्रह समझे जाने वाले ग्रहों में से अधिकतर ग्रहों का प्रभाव 7 वें घर पर हो और पंडित को कुछ सुनाई ना दे अनेक को उपाय बताने के बावजूद काम ना बने तो वृक्ष विवाह की सलाह दी जाती है।

कुंडली के इस सातवें घर पर जब काफी ग्रहों का असर हो तो पहला पति या पहली पत्नी के लिए अच्छा नहीं होता और अक्सर दूसरी शादी की नौबत आ जाती है।

अधिकतर लोगों के साथ ऐसा होता है कि शादी के पश्चात उन्हें इस बात का भान होता है कि जिससे शादी हो चुकी है उससे बेहतर विकल्प अब उनके पास मौजूद है इसी कशमकश में व्यक्ति फस जाता है और लोगों की जिंदगी एक प्रेम त्रिकोण की तरह बन जाती है जिसमें एक बात निश्चित है कि पहली शादी खत्म होगी तब दूसरी शादी होगी।

यदि दो शादी का योग हो तो उसे ज्योतिषी 1 मिनट में जान जाएंगे परंतु ध्यान से देखने की आवश्यकता जरूर होगी ऐसी स्थिति मैं विद्वान को चाहिए की जातक को यह बात बताएं कि उसके जीवन में जब तक दूसरी शादी की नौबत नहीं आई है तब तक एक शादी इस तरह से कर ली जाए कि जिसका संबंध किसी मनुष्य से ना हो अपितु एक जड़ वृक्ष या मिट्टी के घड़े के साथ शादी की जा सकती है।

कौन करे वृक्ष विवाह

वृक्ष विवाह के लिए कुंडली में दो शादी के योग का होना आवश्यक है अन्यथा यदि आपकी शादी अच्छी चल रही है और आप स्वेच्छा से या किसी के अपर्याप्त ज्ञान के आधार पर सलाह लेकर वृक्ष विवाह करते हैं तो यह आप की दूसरी शादी होगी और दूसरी शादी का नाम तक सुनकर कुछ लोगों के पैरों के नीचे से जमीन निकल जाती है।

वृक्ष विवाह का क्या है अर्थ

वृक्ष से विवाह का सीधा अर्थ यह है कि आपको पहली शादी करनी है जिस पर आपकी कुंडली के सातवें घर के ग्रहों का असर पढ़े क्योंकि आपके जीवन में जिस से पहले शादी होगी वह सफल नहीं होगी अब उस वृक्ष पर आपके बुरे ग्रहों का असर आ जाएगा।

अब जब भी आप किसी मनुष्य से शादी करेंगे तो वह दूसरी शादी कहलाएगी और दूसरी शादी का संबंध कुंडली के दूसरे घर से होता है जो एक नई जिंदगी की शुरुआत है।

पीपल के वृक्ष से विवाह

कई वृक्ष हैं जिनसे विवाह किया जा सकता है जिसमें प्रमुख रुप से पीपल के वृक्ष का नाम लिया जाता है इसके पश्चात अर्थ विवाह है कुंभ से विवाह है या फिर तुलसी से विवाह है जो पुरुषों के लिए होता है।कुछ लोग बेरी के वृक्ष से विवाह करवा देते हैं परंतु जो भी है यहां एक बात पर किसी का ध्यान नहीं जाता। वह यह कि कुछ वृक्षों पर भूत प्रेत पितर तथा कुछ रहस्यमई शक्तियों का प्रभाव होता है।

यूं तो पीपल के वृक्ष मैं ब्रह्मा विष्णु महेश का वास बताया जाता है परंतु यही पीपल का वृक्ष पितरों के लिए भी होता है और पित्त अबे है जो मृत हैं मर चुके हैं परंतु पीपल के वृक्ष से विवाह के विषय में कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें जानना बेहद आवश्यक है।

 

सबसे पहली बात तो यह है कि पीपल का वृक्ष ब्रह्मा विष्णु महेश के वास के रूप में जाना जाता है कहा जाता है कि इसमें पितरों का भी वास होता है।

 

पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है हिंदू पीपल के वृक्ष को बहुत शुभ और वरदायक मानते हैं।  परंतु पीपल के वृक्ष के साथ विवाह करने से पूर्व यह जांच लें कि यह वृक्ष कहां पर है यदि यह सुनसान स्थान पर है जहां कोई आता-जाता ना हो तब ऐसे पीपल पर पितरों का भूत-प्रेत आदि का वास होता है। आपको  ऐसे  पेड़  से  शादी  नहीं  करनी  चाहिए  क्यूंकि  ऐसे  पेड़  की  बुरी  शक्तियों  का प्रभाव  आपके ऊपर  भी  पड़ेगा। यदि पीपल का वृक्ष मंदिर में हो उस पर लोग नित्य पूजा आदि करते हो तो ऐसे पीपल पर देवताओं का वास होता है ऐसे ही पीपल के वृक्ष से आप विवाह संपन्न कर सकते हैं।

निष्कर्ष

शादी हमारे जीवन के एहम फैसलों में से एक है। एक ज्योतिष से अपने विवाह के पूर्व अपनी कंडली पढ़वाना अत्यंत आवशयक है । यदि मंगल और शनि का प्रभाव, राहु की दृष्टि या अधिक ग्रहो का प्रभाव अगर कुंडली के सातवे घर पर होता है तो इसे विवाह के लिए शुभ नहीं माना जाता और आपको इसके लिए कई उपाए बताये जाएंगे। अगर आपको एक पेड़ से शादी करने का उपाए मिले तो अपने ज्योतिष से पूछे की क्या आपकी कुंडली मे दो शादियों का योग है क्यूंकि वृक्ष विवाह तभी हो सकता है अगर कुंडली मे ये योग हो । अगर योग है तो ऐसे पेड़ से शादी करे जो मंदिर के पास स्थित हो और जिसकी लोग पूजा करते हो ।

 

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