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पराक्रम और जीवन

यह कार्य हम बगलामुखी मन्त्र से भी कर सकते हैं परन्तु बगलामुखी मंत्र की विधि थोड़ी मुश्किल है | पहले यह स्पष्ट कर देना आवश्यक होगा कि पराक्रम है क्या ?

पराक्रम का अर्थ है दो या दो से अधिक व्यक्तियों में प्रतिस्पर्धा की जंग | जो इस जंग में जीत जाता है उसका पराक्रम अधिक है | पराक्रम के बिना मनुष्य का जीवन अर्थहीन है | पराक्रम व्यक्ति को लक्ष्य देता है | यदि लक्ष्य जीवन में नहीं होगा तो व्यक्ति खानाबदोश से अधिक कुछ नहीं है |

पराक्रम की आवश्यकता हर किसी को है फिर चाहे वह विद्यार्थी हो, व्यापारी हो, नौकरीपेशा या प्रतिदिन मेहनत करके रोटी कमाने वाला मजदूर | हर किसी को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है | इस प्रतिस्पर्धा में हमेशा विजयी रहने वाले लोग आगे चलकर दूसरों के लिए पात्र बन जाते हैं |

नौकरी की बात करें तो आपका काम किसी और को आपकी तरह आता है तो वह एक दिन आपकी जगह ले लेगा | यदि आप बिजनेसमैन हैं तो लोग आपके विकल्प की प्रतीक्षा में रहेंगे और जब आपके विकल्प में किसी को आपसे ज्यादा मिलेगा तो आपका काम ख़त्म | यह चक्र ऐसे ही चलता रहेगा | बेहतर की जीत होगी यह आवश्यक नहीं परन्तु पराक्रमी हमेशा आगे रहेगा यह सत्य है |

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो प्रतिदिन दूसरों को अपने पर हावी होने देते हैं या जिन्हें आदत होती है दूसरों के सामने हीन होने की | क्या कोई कभी भी आकर आप पर हावी प्रभावी हो जाता है ? यदि ऐसा है तो पराक्रम की आपको आवश्यकता है | क्या आपके जीवन में कभी ऐसा हुआ है कि शत्रु को भी आपकी तारीफ़ करनी पड़ी हो ? क्या किसी को आपने हराया है ? क्या आप अकेले हैं जिनकी जगह लेने के लिए लोग लालायित तो रहते हैं परन्तु अभी तक आपकी जगह लेने वाला कोई जीवन में नहीं आया है ?

दो शब्दों में यदि कहें तो केवल इतना ही है कि साँस लेने के लिए जैसे वायु की आवश्यकता पड़ती है उसी तरह समाज में रहने और जीवनयापन के लिए पराक्रम आवश्यक है |

कैसे बनें पराक्रमी

यहाँ तक तो स्पष्ट है कि पराक्रमी व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली हर बाधा को पार कर लेता है | विजय उसके कदम चूमती है | परन्तु हर किसी को यह दिव्य गुण प्राप्त नहीं है |

पराक्रमी बनने के लिए आपको विशेष कुछ करने की आवश्यकता नहीं है बस थोड़े से धैर्य और श्रद्धा के साथ आपका काम बन सकता है | द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर नाम से मुहूर्त होते हैं | इनमे किये गए क्रिया कलाप का फल दोगुना या तीन गुना होता है | केवल पुष्कर मुहूर्त में साधना प्रारम्भ करें | संकल्प लेने के पश्चात आपको नीचे दिए मन्त्र को ४० दिन में १२० माला जाप करना है | एक माला में १०८ मन्त्र हो जायेंगे | माला केवल काले हकीक की होनी चाहिए |

यदि आप उपरोक्त विधि से जप ४० दिन में पूरा कर लेते हैं तो न केवल आप अपने प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा देंगे बल्कि आने वाले ३ महीने तक आपके विरोध में आने वाला कोई नहीं होगा | जी हैं इस मन्त्र का असर कम से कम ३ महीने तक रहता है | इसके बाद आप पुन: इस मन्त्र की साधना प्रारम्भ कर सकते हैं |

 

मन्त्र है :-

ॐ नृ नृसिंहाय नमः |

किसी भी प्रकार की जिज्ञासा के लिए नीचे दिए कमेन्ट बाक्स का प्रयोग करें |

 

6 comments

  1. hdchatla@gmail.com

    what is viprit raj yoga

  2. when does it happen?

  3. what is dwipushkar and tri pushkar yog?

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