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Lagna

क्या है आपका जन्म लग्न

लग्न यानि प्रथम भाव का कुंडली में विशेष स्थान है I  लग्न से व्यक्ति के चरित्र, रंग रूप, चेहरे की बनावट, व्यक्तित्व तथा प्रभाव का पता चलता है I लग्न में बैठा ग्रह स्वयं ही बलवान हो जाता है I

चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र ये सब शुभ ग्रह हैं तथा राहू, मंगल, शनि, सूर्य, तथा केतु ये सब पाप ग्रह हैं I लग्न में बैठे ग्रह का व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है I उसी के अनुसार व्यक्ति का स्वभाव होता है I लग्न में जो राशि होती है उसका भी जातक पर बहुत प्रभाव पड़ता है I लग्न से ही पता चलता है कि जातक पिछले जन्म का जातक के इस जन्म पर क्या प्रभाव पड़ रहा है I व्यक्ति झूठ बोलता है या सच इसका पता भी लग्न से चल जाता है I
लग्न से मनुष्य के स्वास्थ्य के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है I

सूर्य का लग्न में होना दर्शाता है कि व्यक्ति महत्वकांक्षी है I उसे जीत पाना मुश्किल होता है I शान से रहना, निडरता, माता पिता की भक्ति, नेतृत्व करने की क्षमता यह सब गुण उसमे होते हैं I व्यक्ति धार्मिक होता है तथा अच्छे पद पर कार्य करता है I

चन्द्र के लग्न में होने से व्यक्ति भावुक, चंचल, तेज गति से चलने वाला, हंसमुख, हाजिरजवाब और डरपोक होता है I
मंगल के लग्न में होने से मंगलीक योग बनता है I मंगल का व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है I लड़ाई झगडा, चोट चपेट, एक्सीडेंट आदि जीवन में होते रहते हैं परन्तु यदि मंगल स्वराशी, उच्च राशि, मूल त्रिकोण, गुरु से दृष्ट, मेष, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन राशि का हो तो चोट आदि का भय नहीं रहता I व्यक्ति परिश्रमी, सदा व्यस्त, चोट के निशान से युक्त होता है I चेहरे के रंग में लाली होती है I

बुध व्यक्ति के लग्न में हो तो व्यक्ति चालाक, शीघ्रता से मित्र बनाने वाला, बोलने में चतुर, व्यापारी, धनवान और सदा पैसे के बारे में सोचने वाला होता है I
गुरु जिस व्यक्ति के लग्न में होता है वह हमेशा सच बोलने वाला, दयालु, विद्वान्, भाग्यशाली, पत्नी पर हावी रहने वाला और धर्मात्मा होता है I उस व्यक्ति के जीवन में किसी चीज़ की कमी नहीं रहती I उसके काम दूसरे लोग बिना कहे ही पूरे कर देते हैं I वास्तव में यह एक प्रकार का राजयोग हो जाता है बशर्ते गुरु नीच राशि में न हो I

शुक्र के लग्न में होने से व्यक्ति स्त्रियों का प्रिय, सुन्दर न हो तो भी आकर्षित करने वाला चेहरा, चुम्बकीय व्यक्तित्व वाला, भोग विलास में लिप्त, चतुर तथा भाग्यशाली होता है I ऐसा व्यक्ति आलसी होता है I
शनि के लग्न में होने से व्यक्ति लम्बा कद, सांवला रंग, लालच और लोभ से दूर रहने वाला, एकान्तप्रिय, लोगों की परवाह न करने वाला, बड़े लक्ष्य की ओर अग्रसर हमेशा अपने काम में लगा रहने वाला होता है I

राहू के लग्न में होने से व्यक्ति रहस्यमय स्वभाव वाला होता है I  उसे खुद भी पता नहीं होता कि थोड़ी देर बाद वह क्या करने वाला है I ऐसा व्यक्ति खतरनाक साबित होता है अगर राहू को शनि या मंगल का साथ मिल जाए I ऐसा व्यक्ति कूटनीति से कार्य करने वाला, शत्रुता तब तक रखता है जब तक प्रतिशोध न मिल जाए I लग्न में राहू होने से दाम्पत्य जीवन दुखमय हो जाता है I राहू यदि मेष वृश्चिक कुम्भ या मकर राशी का हो तो व्यक्ति क्रोधी और दुराग्रही होता है I ऐसे जातक की पत्नी को कई बार गर्भपात का भय रहता है I

केतु के लग्न में होने से जातक बिजली से सम्बंधित काम करने वाला, क्रोधी, लालची, भोगी और लम्बा शरीर लिए होगा, ऐसे जातक के शरीर का निचला हिस्सा अपेक्षाकृत पतला होता है I केतु लग्न में होने से भी दाम्पत्य को नुक्सान पहुँचता है I तलाक की संभावना बनी रहती है
Just One Gemstone Is Enough

 

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