Kumbha Vivah

Kumbha Vivah

क्या है कुम्भ विवाह

कुम्भ विवाह का सम्बन्ध मांगलिक योग से है | मंगल जन्मकुंडली में 1,4,7,8,12वें स्थान में बैठा हो तो मंगल की दृष्टि कुंडली के सातवें घर पर पड़ती है | सातवाँ घर कुंडली में पत्नी या जीवनसाथी का होता है | विवाह के लिए सातवें घर की स्थिति का आकलन किया जाता है | यदि मंगल का प्रभाव या स्थिति सातवें घर पर हो तो मांगलिक योग बनता है | यह योग चालीस प्रतिशत लोगों की कुंडलियों में मिल जाएगा और इसमें मंगल की क्षमता का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही पता चलता है कि मांगलिक योग है या नहीं | इस तरह से देखा जाए तो मांगलिक का प्रतिशत चालीस प्रतिशत से सीधा दस या बारह प्रतिशत पर आ जाएगा | इनमे से भी जो लोग बहुत हद तक मंगल के बुरे प्रभाव से पीड़ित हैं या जिनका पहला विवाह मांगलिक दोष या किसी अन्य योग के कारण टूटने का योग हो उन्हें कुम्भ विवाह की सलाह दी जाती है |

क्यों किया जाता है कुम्भ विवाह

कुम्भ विवाह करने के पीछे बहुत ही औचित्य पूर्ण तर्क मिलता है कि यदि किसी कन्या की दो शादियों का योग हो तो शादी से पहले विधि विधान से जिस प्रकार किसी व्यक्ति के साथ विवाह किया जाता है उसी प्रकार निर्जीव वस्तु यानी घड़े से विवाह कराकर उस घड़े को तोड़ दिया जाता है | इस तरह से कन्या की जब शादी होगी तो उसे पहली न मानकर दूसरी शादी माना जाएगा |

किसे करना चाहिए कुम्भ विवाह

कुम्भ विवाह किसे करना चाहिए या किसे नहीं करना चाहिए यह जानना आवश्यक है क्योंकि ऐसे झोलाछाप पंडित भी हैं जो अधकचरे ज्ञान के चलते केवल यह देखकर कि लड़की मांगलिक है कुम्भ विवाह की सलाह दे देते हैं | अपने थोड़े से पैसों के लाभ के लिए जो लोग ऐसा करते हैं उसका खामियाजा किसी मासूम को भुगतना पड़ सकता है | कुम्भ विवाह भी वास्तव में विवाह ही है और इसके बाद होने वाले विवाह को कुंडली के दूसरे घर से देखा जाएगा | यदि सभी मांगलिक लोगों का कुम्भ विवाह जरूरी है तो तलाक या पुनर्विवाह के मामले कम से कम चालीस प्रतिशत केवल मांगलिक लोगों की वजह से होते | इसलिए केवल मांगलिक देखकर जो लोग अनाप शनाप भविष्यवाणी करते हैं उनसे बचें | कुम्भ विवाह तभी करना चाहिए जब दो विवाह का योग कुंडली में हो | नीचे दी गई कुंडली मेरे एक मित्र की बेटी की है जिसे मैंने स्वयं कुम्भ विवाह की सलाह दी थी |

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सबसे पहली बात तो यह है कि यह जातिका मांगलिक नहीं है | शुक्र और शनी सातवें घर में काफी अच्छे होते हैं परन्तु एक साथ नहीं | इस कुंडली में दो विवाह का योग है जिसकी वजह यह है कि शुक्र चित्र नक्षत्र में है जो कि मंगल का है | मंगल इस कुंडली में छठे स्थान से सम्बन्ध रखता है | छठे स्थान से सातवें स्थान का सम्बन्ध ही पहले विवाह को असफल करना के लिए काफी है | शनि भी स्वाति नक्षत्र में है जो कि राहू का है | इस तरह सातवें घर का सम्बन्ध मंगल, राहू और शनि से है | शनि इस कुंडली में उतना बुरा प्रभाव नहीं रखता है क्योंकि उच्च राशि में है इसलिए मंगल और राहू से दो विवाह का योग बनता है |

कुम्भ विवाह के अन्य विकल्प

अर्क विवाह या वट विवाह का भी वही उद्देश्य होता है जो कुम्भ विवाह का है | स्थान और देश के अनुसार सब जगह अपनी अपनी तरह से लोग कुम्भ विवाह या अर्क विवाह करते हैं | वट वृक्ष से विवाह करवाना वट विवाह कहलाता है | आक का पौधा होता है आक के पौधे से विवाह अर्क विवाह कहलाता है और भी कई चीजें हो सकती हैं परन्तु उपरोक्त जो कुछ मुझे ज्ञात है मैंने वही लिखा है | अर्क का पौधा शनि से सम्बन्धित है जहाँ शादी में देर के लिए शनी जिम्मेदार हो वहां अर्क विवाह किया जा सकता है | मंगल के लिए कुम्भ विवाह ही होता है | यदि कन्या की कुंडली में वैधव्य योग हो तो उत्तर भारत में विष्णु की प्रतिमा से विवाह किया जाता है |

निष्कर्ष

यदि जरूरी हो तो कुम्भ विवाह, अर्क विवाह या वट विवाह जो भी कहा गया है करवाने में कोई नुक्सान नहीं है | यह क्रिया श्रद्धा और विशवास के साथ की जानी चाहिए | इस क्रिया को गुप्त रूप से करना चाहिए | यदि लड़की के मामा की मदद ली जाए तो सर्वोत्तम है | वट विवाह, पीपल विवाह आदि से बचना चाहिए क्योंकि वृक्षों पर ओपरी पराई शक्तियों का प्रकोप हो सकता है |

 

 

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