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जन्मकुंडली में परिवर्तन योग

भारतीय ज्योतिष ईश्वर द्वारा संसार को दी गई एक अनमोल धरोहर है | इस धरोहर के माध्यम से हम एक दर्पण की भांति अपना भविष्य देख सकते हैं | यदि आप ज्योतिष के जानकार है या थोडा बहुत भारतीय ज्योतिष को समझते हैं तो इस लेख में आपको मैं आपको अपने एक नए अनुभव से परिचित करवाऊंगा |

जन्मकुंडली में ग्रहों का राशि परिवर्तन

राशी परिवर्तन योग योग में दो ग्रह एक दुसरे की राशी में विराजमान होकर कुंडली को विशेष बना देते हैं | दो ग्रहों का आपस में राशी परिवर्तन यानी आपकी कुंडली के कम से कम दो ग्रह आपके लिए शुभ अवस्था में होना | यह ऐसा ही है जैसे आप किसी और के घर का ख्याल रखेंगे और वह व्यक्ति आपके घर का ख्याल रखेगा | ग्रहों की ये अवस्था विशेष है क्योंकि दोनों ग्रह पूरी तरह से एक दुसरे पर निर्भर हैं |

निर्भरता की इस अवस्था में ग्रहों का प्रभाव पूरी तरह से सकारात्मक होता है | दोनों ग्रहों का बल बढ़ जाता है | अब सवाल उठता है कि इस योग का फल कब मिलता है | उत्तर यह है कि जब एक की महादशा और दुसरे की अन्तर्दशा आती है तब परिवर्तन योग का फल मिलता है | यह समय बेहद भाग्यवर्धक रहता है |

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यह कुंडली स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गाँधी की है | इनकी जन्मकुंडली में एक नहीं बल्कि तीन परिवर्तन योग हैं | सूर्य मंगल की राशी वृश्चिक में हैं और मंगल सूर्य की राशी सिंह में | शनि चन्द्र की राशी कर्क में और चन्द्र शनि की राशी मकर में हैं | शुक्र गुरु की राशी धनु और गुरु शुक्र की राशी वृष में हैं | कुल मिलाकर छह ग्रह परिवर्तन योग बना रहे हैं | यह अपने आप में एक राजयोग है | संसार जानता है कि जब इन्होंने राज किया तब इनके प्रभाव की समानता करने वाला कोई नहीं था |

परिवर्तन योग वास्तव में बहुत बड़ा राजयोग है | इसकी तुलना उच्च राशी में बैठे ग्रहों से की जा सकती है |

परिवर्तन योग राशि से ही नहीं अपितु नक्षत्रों से भी बनता है | यदि एक ग्रह दुसरे ग्रह के नक्षत्र में है और दूसरा ग्रह पहले ग्रह के नक्षत्र में है तो इसे भी परिवर्तन योग के समकक्ष ही समझा जाना चाहिए | उदाहरनार्थ यदि चन्द्र धनिष्ठा नक्षत्र में और मंगल श्रवण नक्षत्र में हो तो यहाँ परिवर्तन योग माना जाएगा |

इस योग का फल पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है | यदि सप्तम स्थान का स्वामी पंचम भाव में और पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में हो तो प्रेम  विवाह का योग बनता है | यदि नवम भाव का स्वामी दशम में हो और दशम का स्वामी नवम भाव में हो तो यह सरकारी नौकरी का योग है | यदि पंचम भाव का स्वामी एकादश में और एकादश का स्वामी पंचम में हो तो यह लाटरी का योग है |

 

One comment

  1. Respected sir
    As per above yog you mention . Which yog is in my KuDali?
    dob-16/12/1988
    place-nagpur (Maharashtra)
    time – 11.15 Am
    thanking you

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