Home » Hindi » जन्म कुंडली मिलान और संजोग

जन्म कुंडली मिलान और संजोग

Horoscope matching and coincidence

संजोग से यहाँ अभिप्राय वैवाहिक संजोग का है | कहते हैं कि जोड़ियाँ आसमान में बनती हैं | वह जोड़ी जो विवाह के बंधन में बंधने वाली है उसके साथ प्रथम संपर्क से ही कड़ियाँ जुड़ने लगती हैं | धीरे धीरे सम्बन्ध प्रगाढ़ होते हैं और विवाह होते ही जीवन सार्थक हो जाता है |

हर वर वधु विवाह से पूर्व ही अपने जीवन साथी के बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करते हैं | ज्योतिष की बात करें तो कुंडली मिलाते मिलाते ज्योतिषी को पता चल जाता है कि किस व्यक्ति के साथ संजोग हैं या कौन सी कुंडली के व्यक्ति के साथ व्यक्ति का विवाह भाग्य ने निश्चित किया है |

Download this article in PDF

जन्मकुंडली के अनुसार विवाह संजोग

आइये ज्योतिष की दृष्टि में देखते हैं कि कैसे बनते हैं संजोग | सबसे पहले जन्म लग्न की बात करते हैं | भावी वर वधु के जन्म लग्न एक हों यह कोई आवश्यक नहीं है परन्तु कहीं न कहीं समानता अवश्य देखने को मिलती है | उदाहरण के लिए यदि एक का जन्म लग्न मेष है तो हो सकता है कि दुसरे की कुंडली में वृश्चिक लग्न हो या फिर नवमांश मेष या वृश्चिक हो सकते हैं | दोनों लग्नों का स्वामी मंगल है | यहाँ स्पष्ट कर दूं कि नवमांश से पति या पत्नी का विचार किया जाता है |

जन्मकुंडली के सप्तम भाव में वर या वधु का जो ग्रह बैठा हो हो सकता है कि दुसरे व्यक्ति की कुंडली में वह ग्रह लग्न या नवमांश लग्न में बैठा हो |

जिसके साथ सर्वाधिक गुण मिलें उससे भी शादी का संजोग हो सकता है | इस सन्दर्भ में २७ से ऊपर गुणों का होना प्रयाप्त माना जा सकता है |

पुरुष की कुंडली में शुक्र से पत्नी और स्त्री की कुंडली में गुरु से पति का विचार किया जाता है | एक की कुंडली का शुक्र दुसरे की कुंडली में भी उसी स्थान में बैठा हो तो वैवाहिक संजोग समझना चाहिए |

एक का नवमांश दुसरे की जन्मकुंडली से मेल खाए तो वैवाहिक संजोग हैं ऐसा समझना चाहिए |

प्रेम विवाह और संजोग

जरूरी नहीं कि जिससे आप प्यार करते हैं उसके साथ आपके संजोग भी हों | इस बात की जाँच करने के लिए जन्मकुंडली में कुछ और जरूरी बातें हैं जिनसे एक मिनट में पता लगाया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति की अमुक व्यक्ति से शादी होगी या नहीं | दो कुंडलियों में परस्पर प्रेम विवाह का योग है या नहीं |

कुंडली के पंचम भाव से प्रेम सम्बन्ध, प्रेम संबंधों की तीव्रता, कितने प्रेम सम्बन्ध होंगे, प्रेमी प्रेमिका का आपस में कितना प्यार होगा, प्रेमी या प्रेमिका से शादी होगी या नहीं इन सब का विचार किया जाता है |

पंचम स्थान है प्यार का और सप्तम है शादी का | जब दोनों स्थानों में कोई सम्बन्ध हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है | यह सम्बन्ध जितना अधिक मजबूत होगा उतनी ही संभावना प्रेम विवाह की होगी |

परन्तु जब दो कुंडलियों का मिलान किया जा रहा हो तब दोनों कुंडलियों में प्रेम विवाह है या नहीं ये देखना चाहिए | उसके पश्चात वैवाहिक संजोग हैं या नहीं इस पर विचार करना चाहिए |

इसके लिए देखें कि दोनों कुंडलियों में सातवें घर का स्वामी कौन है | मान लीजिये कि एक कुंडली में सातवें घर का स्वामी शुक्र है और दूसरी कुंडली में सातवें घर का स्वामी चन्द्र है तो अब देखना यह है कि शुक्र और चन्द्र यदि दोनों के लग्न में या नवमांश में एक साथ बैठे हैं या नहीं | यदि हैं तो दोनों का वैवाहिक संजोग है | यदि नहीं तो किसी अन्य योग पर विचार करना चाहिए |

दोनों कुंडलियों में पांचवें घर का स्वामी कौन है | मान लीजिये कि एक कुंडली में पांचवें घर का स्वामी सूर्य है और दूसरी कुंडली में पांचवें घर का स्वामी मंगल है तो अब देखना यह है कि सूर्य और मंगल यदि दोनों के लग्न में या नवमांश में एक साथ बैठे हैं या नहीं | यदि हैं तो दोनों का वैवाहिक संजोग है | यदि नहीं तो किसी अन्य योग पर विचार करना चाहिए |

केवल दो नियम देने का अर्थ यह नहीं कि कुंडली मिलान और विवाह संजोग देखने के लिए और कोई योग या नियम ही नहीं हैं | ऐसे पचास नियम तो इस समय भी मेरे मस्तिष्क में हैं परन्तु उन सब का यहाँ पर विवेचन करना थोडा मुश्किल है | परन्तु यह कहा जा सकता है कि उपरोक्त बातों का विचार किया जा सकता है |

 

 

 

 

Leave a Reply

Follow me on Twitter