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break up in relationship as per astrology

Break in Relationship

प्रेम सम्बन्ध ऐसा रिश्ता है जो स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है | इसके लिए कोई ठोस वजह नहीं होती | बस जो व्यक्ति मन को भा जाए उसकी हर बात अच्छी लगती है | यह रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है जब सामने वाला भी आप ही की तरह बेचैन हो | प्रेम की इस तरह शुरुआत होती है | प्रेमी जोड़े के लिए कोई काम मुश्किल नहीं लगता | प्रेम में पड़ा व्यक्ति अलग नजरिये से दुनिया को देखता है | वह नजरिया बेहद सकारात्मक होता है | इस तरह प्रेम एक ऐसा एहसास है जो व्यक्ति को ऊर्जा से भर देता है | असल में यही ऊर्जा व्यक्ति को आगे ले जाती है |

किसी भी काम में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्साह और क्रियाशीलता की आवश्यकता पड़ती है | यह उत्साह और उमंग व्यक्ति को प्रेम से मिलती है | इसीलिए प्रेम का जीवन में वही स्थान है जो शरीर में आत्मा का होता है |

यदि किसी कारण से रिश्तों में खटास आ जाए या मतभेद पैदा हों तो रोग जैसी स्थिति पैदा हो जाती है | यही प्रेम रोग है जिसका उपचार केवल प्रेम से ही हो सकता है | परन्तु कभी कभी रिश्ते टूटने के कगार पर आ जाते हैं | उस अवस्था में व्यक्ति को जीवन से कोई लगाव नहीं रह जाता | यदि आप भी ऐसी ही स्थिति से रूबरू हो रहे हैं तो निस्संदेह ज्योतिष मदद कर सकता है |

ज्योतिष के अनुसार प्रेम का संचार व्यक्ति में शुक्र और मंगल से होता है | लड़कियों में मंगल और लड़कों में शुक्र वीर्य के रूप में होता है | इसलिए दोनों ग्रहों का जन्मकुंडली में भी वही महत्व है जो प्रेम का जीवन के लिए है और आत्मा का शरीर के लिए है |

नीचे दी गई कुंडली में स्पष्ट रूप से यह बात देखी जा सकती है कि बेहद मजबूत रिश्ता शादी के नजदीक पहुँचने के बाद भी कैसे टूट गया | यह कुंडली UP की रहने वाली एक महिला की है | जन्म समय है 10/17/1986 – 10:15 AM |

इस कुंडली में प्रेम का प्रतिनिधि शुक्र,  राहू के साथ विराजमान है | राहू प्रेम में विवाद उत्पन्न करने वाला ग्रह है | वैसे प्रेम विवाह भी राहू ही करवाता है | परन्तु इस कुंडली में राहू एक ऐसी राशि में बैठा है जो उसके शत्रु की है | इस तरह राहू ने प्रेम करने का अवसर तो दिया परन्तु जब बात विवाह तक जा पहुंची तो अचानक किसी बात पर यह रिश्ता टूट गया | उल्लेखनीय है कि राहू के साथ शुक्र, रिश्तों में अवरोध पैदा करता है | दूसरी ओर स्त्री की कुंडली में मंगल सेक्स का कारक ग्रह है इसलिए विपरीत लिंग से सुख मिलेगा या दुःख इसके लिए मंगल पर विचार करना आवश्यक है | मंगल इस कुंडली में सातवें भाव में बैठा है और प्रबल मांगलिक योग बन रहा है | राहू पृथकताजनक ग्रह है और मंगल पर राहू की नौवीं दृष्टि है | यानि मंगल पर राहू का पूरा प्रभाव है और मंगल को कहीं से मदद भी नहीं मिल रही है | यदि कोई शुभ ग्रह मंगल के साथ होता या कोई शुभ ग्रह मंगल को देख रहा होता तो यह रिश्ता टूटने से बच सकता था |

इस जन्मकुंडली के विश्लेषण से पता चलता है कि मंगल जो स्त्रियों में सेक्स और प्रेम का संचार करता है वह अत्यंत पीड़ित है |

अब आते हैं नवमांश कुंडली पर | नवमांश जीवन साथी की कुंडली होती है | नवमांश से ही पता चलता है कि जीवनसाथी कैसा होगा ? जीवनसाथी का व्यवसाय कैसा होगा | जीवनसाथी के साथ कैसे सम्बन्ध रहेंगे आदि | चूँकि यह कुंडली महिला की है इसलिए नवमांश पति की कुंडली हुई | स्त्री की कुंडली में पति यानी पुरुष | पुरुष की कुंडली में पत्नी का विचार शुक्र से किया जाता है | नवमांश में भी शुक्र राहू केतु के अक्ष में है | इस प्रकार प्रेम में असफलता का योग बनता है |

 

 

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