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वास्तु के कुछ अनछुए पहलू

वास्तु का जितना प्रचार प्रसार आज किया जा रहा है दस वर्ष पहले इसका १० परसेंट भी नहीं था | वास्तु स्वयं सिद्ध विज्ञान है जिसे कुछ लोग नकार भी दें तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता | लोग वास्तु को नकारते तो नहीं परंतु इसका इसके नियमों का उल्लंघन अवश्य करते हैं |

मैंने खुद भी वास्तु के नियमों का उल्लंघन किया होगा परंतु जहाँ तक संभव हो इससे बचें | यदि यह भी न हो सके तो कम से कम कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखा जा सकता है |

मेरा काम लोगों कुंडलियों का निरिक्षण करना है जो मैं रोज करता हूँ | इसके अलावा मैंने बहुत से घरों का वास्तु निरीक्षण किया है | पिछले कुछ सालों में लोग इस बारे में अधिक सजग दिखाई देते हैं | अब नए घरों में पूजाघर पूर्व या ईशान में बनने लगा है | लोग जानते हैं कि बच्चों का कमरा कौन सा होना चाहिए | लोगों को पता है कि मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए और किस दिशा में नहीं |

यह बात सुखद है और इससे लोगों की जागरूकता भी दिखाई देती है | फिर भी कुछ लोग ८०% वास्तु निर्मित भवन में सुखी नहीं हैं या दुखी हैं तो इसे क्या कहेंगे | क्या आप वास्तु को झूठा या गलत ठहरा सकते हैं ? पढते रहिये इसका उत्तर मेरे पास है |

एक घटना एक उदाहरण

३ भाई अपने माता पिता के साथ एक ही घर में सुखपूर्वक रहते थे | पिता ने अपनी जमा पूँजी से विवाह योग्य बेटों के लिए घर बनाने का निश्चय किया और एक प्लाट खरीद लिया | अब उस प्लाट के ३ हिस्से करने की बजाय पिता ने उसे २ हिस्सों में बाँट दिया जिसमे बड़े बेटे और छोटे बेटे को बाद में मकान भी बना कर दिया गया | बड़े बेटे ने तो उस मकान में अपना पैसा लगाया परंतु छोटे बेटे को प्यार के वशीभूत माता पिता ने पूरा मकान बना कर दिया | यानि तीन भाइयों में से मंझले भाई को पुराना मकान दिया गया जिस पर पूरे परिवार का हक आज भी है | इस बात को यदि गौर से देखें तो लगेगा कि सब बराबर है परंतु यदि और अधिक गहराई से मूल्यांकन करें तो उस मकान के तीन बराबर हिस्से होने चाहिए थे या एक ही मकान में ऐसी व्यवस्थाएं की जा सकती थीं कि मकान भी अलग अलग न रहें और सबके कमरे भी अलग अलग हों | जैसा कि आधुनिक घरों में देखा जाता है कि पूरा मकान एक ही होता है परंतु सबके कमरे और रसोईघर, स्नानघर तथा घर के अन्य स्थान सुनियोजित होते हैं जो कि सुविधानुसार बनवाए जा सकते हैं अस्तु |

अब स्थिति ये है कि बड़ा बेटा उस मकान में न रहकर किसी अन्य शहर में रहता है तथा स्थानान्तरण न हो पाने के कारण उस घर का सुख नहीं भोग पा रहा |

पिताजी मकान बनवाने के बाद स्वर्ग सिधार चुके हैं | इस मकान के बनने के बाद से ही पूरा परिवार बिखर सा गया है | कई वाद विवाद उठे उस घर में हुए और क्यों न हों, वहाँ पर मंझले पुत्र का हक मारकर मकान बनाया गया है जो कि कभी घर नहीं बन पाया |

इस सन्दर्भ में प्रस्तुत हैं वास्तु के कुछ अनछुए पहलू जिनका विचार अन्यत्र कभी नहीं किया गया |

प्लाट खरीदने से पहले

जगह सबसे पहले खरीदी जाती है | जगह खरीदने के लिए खर्च किया जाने वाला पैसा यदि आपका अपना है तो ठीक परंतु यदि आपने यह पैसा अपनी ससुराल से लिया है तो जल्द ही वापस कर दें नहीं तो राहू को अपने होने वाले नए मकान में आप खुद शरण दे रहे हैं |

मकान बनाने के लिए यदि कोई दूसरा मकान बेचा है तो सुनिश्चित कर लें कि उस मकान पर किसी अन्य व्यक्ति का कोई हक न हो या आपने कोई झूठा मुकदमा जीतकर वह मकान हासिल न किया हो |

मकान कभी किसी के साथ नहीं जाता केवल कर्म ही व्यक्ति के साथ जाते हैं इसलिए सुनिश्चित कर लें कि आपके बाद इस मकान का स्वामी कौन होगा | अधिकतर लोग यह गलती कर जाते हैं कि बाद में देखा जाएगा परंतु कम से कम यह बात पहले से निश्चित की जा सकती है |

यदि आपको भूमि मुफ्त में या उपहार में मिली है तो केवल एक ही बात स्मरण रहे, इस भूमि का पूरा उपयोग आप नहीं कर पायेंगे | यदि किसी कारण से कर पाए तो अपनी संतान के विषय में सोचिये | जो कर्म आपने नहीं भोगे या जिन कर्मों का फल आपको नहीं मिला आपकी संतान को अवश्य मिल सकता है इसलिए मुफ्त में भूल कर भी अचल संपत्ति लेकर रिहायशी मकान न बनवाएं |

निसंतान व्यक्ति से मकान मत खरीदें | ऐसा व्यक्ति जिसके कोई संतान न हो और आगे होने की कोई उम्मीद भी न हो, उस व्यक्ति से सस्ते में भी मकान मत खरीदें |

जहां तक हो सके एक ही प्लाट को दो भागों में मत बांटिये या बीच में दीवार मत बनवाएं क्योंकि ऐसा करके आप वास्तु पुरुष के दिल पर भार डाल रहे हैं जो कि हार्ट अटैक को न्योता है |

यदि आपका शनि अच्छा नहीं है तो भूमि के स्वामी स्वयं कभी मत बनें | या तो पत्नी के नाम पर या किसी ऐसे सदस्य के नाम पर मकान को रखें जिस पर आपको पूर्ण विश्वास हो और जिसका शनि अच्छा हो | शनि अचल संपत्ति का कारक है | उसका हर जड़ वस्तु स्थान या भवन पर अधिकार है | एक तरह से यह मान लीजिए कि समय से पहले आप शनि की महादशा को बुला रहे हैं | यदि शनि अच्छा होगा तो महादशा का फल भी अच्छा ही होगा अस्तु |

मकान में सीढ़ियों का विशेष स्थान होता है | यही सीढ़ी आपके भविष्य का निर्धारण करती है | इसलिए सीढ़ी सोच समझ कर बनवाएं | इसके अतिरिक्त रसोई घर और पानी का बहाव, छत और खिड़कियाँ, सेप्टिक टेंक या कुआँ आदि, ये सब चीजें ऐसी हैं जिनका विचार परमावश्यक है क्योंकि पानी, वायु, आकाश, भूमि और अग्नि इन्ही पांच तत्वों से शरीर बना है | वास्तु पुरुष के किसी भी अंग को खराब मत करें अन्यथा आप भी जीवन में उसी तत्व से प्रभावित रहेंगे |

यहाँ पर शुभ मुहूर्त, गृह प्रवेश आदि का विचार नहीं किया गया क्योंकि ये आधारभूत सिद्धांत आप को आसानी से कहीं भी मिल जायेंगे |

वास्तु से जुड़ी किसी भी प्रकार की जिज्ञासा के लिए संपर्क करें |

अशोक प्रजापति

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